RBSE Class 11 English Essay Writing Argumentative Essays

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Rajasthan Board RBSE Class 11 English Essay Writing Argumentative Essays

Importance of Computers

Computer is a man-made machine. It makes calculations at a very high speed with accuracy. It has been called ‘mechanical brain’. The mathematical computer has made the long mathematical calculations easy & quick. It is also useful in the field of medicine & surgery. In the field of space science, computer does complex calculations. It is also being used in the Railways & Post & Telegraph Department. Astrologers use it in the preparation of horoscopes of people. Most of the examination records are kept in the computer.

Computers provide jobs to a large number of people. Software & hardware engineers, computer operators, computants, computer programmers & so on are in great demand these days. Computers extend a helping hand in curbing corruption. All, Govt. departments & private & other agencies have websites with all types of information. People can through internet receive required information. In this way, it adds transparency in the working of the public & private agencies and makes the ‘Right to Information’ easily · accessible.

कम्प्यूटर का महत्त्व

कम्प्यूटर मानव-निर्मित मशीन है। यह तीव्र गति से सही-सही गणनायें कर देता है। इसे ‘यांत्रिक मस्तिष्क’ भी कहा जाता है। गणितीय कम्प्यूटर ने लम्बी-लम्बी गणनाओं को सरलता एवं शीघ्रता प्रदान की है। यह चिकित्सा एवं शल्य-क्रिया के क्षेत्र में भी उपयोगी है। अंतरिक्ष-विज्ञान के क्षेत्र में कम्प्यूटर जटिल गणनायें करता है। इसका उपयोग रेलवे एवं डाक-तार विभाग में भी किया जाता है। ज्योतिषी लोग इसका उपयोग लोगों की जन्म-पत्रियाँ बनाने में करते हैं। परीक्षाओं का अधिकतर लेखा-जोखा कम्प्यूटर में रखा जाता है।

कम्प्यूटर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। सोफ्टवेयर और हार्डवेअर इंजीनियर्स, कम्प्यूटर ऑपरेटर्स, कम्प्यूटेन्ट्स, कम्प्यूटर प्रोग्रैमर्स आदि की इन दिनों बहुत माँग है। भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में भी कम्प्यूटर सहायता करते हैं। सभी सरकारी विभागों और निजी व अन्य एजेन्सियों की अपनी वेबसाइट्स हैं, जिन पर सभी प्रकार की सूचना है। लोग इंटरनेट द्वारा आवश्यक सूचना प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार यह सार्वजनिक और निजी एजेन्सियों के कार्यों में पारदर्शिता लाता है और सूचना के अधिकार की पहुँच आसान करता है।

Blood Donation

With increased pace of life, more and more incidents involving terrorist activities and natural calamities such as, fires, earthquakes and land-slides, more and more blood is needed to save lives.

A campaign is run time and again to encourage people to donate blood by the governmental agencies as well as non-governmental organisations. Blood donation camps are held on important occasions to motivate people in favour of donating blood. Seminars and street-corner-shows are held to educate people on the issue of blood donation. Newspapers carry large-sized advertisements asking people to donate blood and save lives.

There are great misconceptions regarding the donation of blood. It is thought by some that donating blood leads to permanent loss of physical power and strength. Such a misunderstanding must be removed from their minds by educating them. They should be told that blood regenerates itself very quickly compensating for the donated blood. Again, it is not the blood alone that decides the bodily power and strength. Many other factors decide them.


जीवन की बढ़ी हुई रफ्तार, आतंकवादी गतिविधियों तथा प्राकृतिक विपदायें जैसे भूकम्प, आग, भूस्खलन के कारण जीवन बचाने हेतु अधिकाधिक रक्त की आवश्यकता होती है।

लोगों को रक्तदान हेतु प्रोत्साहित करने के लिए बार-बार सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा अभियान संचालित किये जाते हैं। महत्त्वपूर्ण अवसरों पर रक्तदान शिविर आयोजित किये जाते हैं ताकि लोगों को रक्तदान हेतु प्रेरित किया जा सके। रक्तदान के मसले पर लोगों को शिक्षित करने हेतु गोष्ठियों तथा नुक्कड़ नाटकों का आयोजन भी किया जाता है। अखबारों में भी बड़े-बड़े विज्ञापन छपते हैं जो लोगों से रक्त देकर जीवन बचाने का आग्रह करते हैं।

रक्तदान के बारे में बड़ी-बड़ी गलतफहमियाँ मौजूद हैं। ऐसा माना जाता है कि रक्तदान करने से शारीरिक शक्ति का स्थायी नुकसान हो जाता है। ऐसी गलतफहमी को उनके मन से निकाला जाना चाहिए। उन्हें इस बारे में जागरूक बनाया जाना चाहिए। उन्हें बताया जाना चाहिए कि रक्त बड़ी जल्दी ही स्वयं को पुनर्जीवित कर लेता है तथा दिये गये रक्त की क्षतिपूर्ति हो जाती है। पुनः केवल रक्त ही शारीरिक शक्ति का निर्धारण नहीं करता। अन्य कई कारक इसमें शामिल होते हैं।

Morning Walk

Walking is the best exercise. It is equally good for the old and the young. It keeps a man healthy and happy. It refreshes our mind and makes us smart. We feel fresh for the rest of the day. We get the habit of early rising. After my examination, I went to my friend who lives in a village.

We got up early in the morning. We started for a morning walk. The time was peaceful. The air was cool and pleasant. We enjoyed the beauties of nature. Flowers were laughing and leaves were dancing. There were green trees and green fields. They looked very beautiful. Birds wer singing. Their voice was very sweet. Farmers were doing work in their fields. The sun was rising in the east. It was red. It looked very nice. The air was fresh and full of natural good smell. After about an hour, I was tired. We sat on the ground. The sand was cool. It gave us pleasure and comfort. I enjoyed the beauty of nature. We came back. I took fresh milk and took rest. I felt that God is really a big artist who made these things for us. I was very happy.

प्रात:कालीन भ्रमण

घूमना सर्वश्रेष्ठ व्यायाम है। यह युवा एवं वृद्ध दोनों के लिए समान रूप से अच्छा है। यह मनुष्य को स्वस्थ एवं प्रसन्न रखता है। यह हमारे दिमाग को ताजा करता है और हमें चुस्त बनाता है। परीक्षा के पश्चात् मैं अपने मित्र के पास गया जो कि एक गाँव में रहता है।

हम प्रातः जल्दी उठे। हम प्रात:कालीन भ्रमण के लिए रवाना हुए। समय शान्तिपूर्ण था। वायु शीतल और आनन्ददायक थी। हमने प्राकृतिक सौन्दर्य का आनन्द उठाया। फूल हँस रहे थे और पत्तियाँ नृत्य कर रही थीं। इधर-उधर हरे वृक्ष व हरे खेत थे। वे बहुत सुन्दर दिखाई पड़ रहे थे। चिड़ियाँ गा रही थीं। उनकी आवाज बहुत अच्छी थी। कृषक खेतों में काम कर रहे थे। पूर्व में सूर्योदय हो रहा था। यह लाल था। वह बहुत सुन्दर दिखाई दे रहा था। हवा ताजी थी और प्राकृतिक सुगन्ध से भरपूर थी। लगभग एक घण्टे के पश्चात् मैं थक गया। हम जमीन पर बैठ गये। मिट्टी ठण्डी थी। इससे मुझे बड़ा आनन्द व आराम मिला। मैंने प्रकृति की सुन्दरता का आनन्द लिया। हम घर आये। मैंने ताजा दूध पिया और विश्राम किया। मैंने अनुभव किया कि ईश्वर वास्तव में बड़ा कलाकार है जिसने ये चीजें बनाईं। मैं बहुत खुश था।

The Tyranny of Noise

The world is growing more and more noisy. Noise tells upon our nerves. It lessens our efficiency and it disturbs our sleep. It has made our ears less sensitive. Noise also creates tension in our mind. The lowering of efficiency lowers the quantity and quality of production. Formerly, there was always a loud noise of machines in the factories. But now, because of its adverse effect on efficiency, the factories are managing to lesssen this menace of noise.

Industries are spending large sums to solve the growing problem of noise. Trees and shrubs have helped a great deal in solving this problem. The walls are now sound-proof. Machines are being kept rubber mounted. These efforts have improved the quantity and quality of our products. Now there is much talk about noise pollution. Noise also spoils the serenity and calmness of our environment. People shall have now to fight against noise as they fight against the bacteria of diseases.

शोरगुल के दुष्परिणाम

विश्व तो आज अधिकाधिक शोरगुल से ग्रस्त होता जा रहा है। शोरगुल तो हमारे स्नायुतंत्रों को भी कुप्रभावित करता है। यह हमारी कुशलता को कम करता है तथा हमारी नींद को भी खराब करता है। इस शोरगुल ने तो हमारे कानों की संवेदनशीलता ही कम कर दी है। शोरगुल से हमारे मस्तिष्क में भी तनाव रहता है। हमारी कार्यकुशलता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कार्यकुशलता में कमी आने से उत्पादन के परिमाणात्मकता तथा गुणात्मकता पर भी कुप्रभाव पड़ता है। पहले के समय तो कल-कारखानों में हमेशा ही बहुत जोर का शोर हुआ करता था। लेकिन अब इसका हमारी कार्यकुशलता पर कुप्रभाव पड़ने के कारण कल-कारखाने भी शोरगुल के इस खतरे को कम करने का प्रबन्ध कर रहे हैं।

कल-कारखाने तथा उद्योग शोरगुल की समस्या को हल करने के लिए काफी बड़ी मात्रा में धन व्यय कर रहे हैं। पेड़ तथा घास-फूसों ने भी इस समस्या को हल करने में काफी मदद की है। दीवारें अब ध्वनि के कुप्रभावों से सुरक्षित प्रकार की होती हैं। मशीनों के शोरगुल को कम करने के लिए उन पर रबड़ चढ़ाकर रखी जाती है। इससे हमारे उत्पादनों के परिमाण तथा गुणात्मकता पर अच्छा प्रभाव पड़ा है। अब तो ध्वनि प्रदूषण के बारे में खूब चर्चा होती है। शोरगुल हमारे वातावरण की शान्ति तथा पवित्रता को भंग करता है। व्यक्तियों को तो अब शोरगुल के विरुद्ध इस प्रकार लड़ना होगा जैसे कि किसी बीमारी के कीटाणुओं को मारने के लिए कोई लड़ाई लड़ी जाती है।

National Integration and the Youth

India is a large country. We follow different religious and speak different languages. People often fight among themselves in the name of religion, region, or language. The pre-independence dragon of communalism is still alive. People with vested interest provoke riots. Even a petty clash is given a communal colour. Our political leaders are also responsible for all this. During elections they exploit the sentiments of region, religion, community and caste. The result is that we are not yet fully integrated as a nation.

We have the National Integration council to promote the cause of National Integration. Representative of various political parties meet together and adopt unanimous resoultions. But we are still far from our long cherished goal.

We cannot get rid of these factions until and unless our youths come forward. Most of them are above communal frenzy and regional feelings. They do not have vested interests. They are true nationalists. They can do a lot to promote National Integration. They should start a campaign against these evils. They can achieve the goal only if they are determined to do so.

राष्ट्रीय एकता और युवा वर्ग

भारत एक विशाल देश है। हम भिन्न-भिन्न धर्मों को मानते हैं और भिन्न भाषाएँ बोलते हैं। लोग धर्म, क्षेत्र अथवा भाषा के नाम पर प्रायः आपस में लड़ते रहते हैं। स्वतंत्रता से पूर्व का साम्प्रदायिकता का अजगर अभी जीवित है। निहित स्वार्थ वाले लोग दंगों को भड़काते हैं। एक छोटे से झगड़े को भी साम्प्रदायिकता का रंग दिया जाता है। इस सबके लिए हमारे राजनीतिक नेता भी उत्तरदायी हैं। चुनाव के समय वे लोगों की क्षेत्रीय, धार्मिक, जातीय और वर्ग भावनाओं का अनुचित लाभ उठाते हैं। परिणाम यह है कि हम अभी भी पूर्ण रूप से संगठित राष्ट्र नहीं हैं।

राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय एकता परिषद् (कौंसिल) है। भिन्न-भिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि मिलते हैं और सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करते हैं। परन्तु अभी भी अपने लक्ष्य से दूर हैं।

हम इन गुटों से छुटकारा नहीं पा सकते जब तक कि हमारे युवक आगे नहीं आयेंगे। उनमें से अधिकांश साम्प्रदायिक उन्माद और क्षेत्रीय भावनों से ऊपर (ऊँचे) उठे हुए हैं। उनके निहित स्वार्थ भी नहीं हैं। वे राष्ट्रवादी हैं। वे राष्ट्रीय एकता को बढ़ाने में बहुत कुछ कर सकते हैं। उनको इन बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। वे यह लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं यदि वे ऐसा करने के लिए कृत संकल्प हैं।

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