Meri Maa Class 6 Summary
easyMeri Maa Class 6 Summary
रामप्रसाद 'बिस्मिल' गज़ब के शायर थे। इनका जन्म उस समय हुआ जब भारत पर अंग्रेज़ों का आधिपत्य था। जेल में रहकर इन्होंने अंग्रेज़ों के अनेक अत्याचार सहे। अपनी आत्मकथा 'मेरी माँ' में उन्होंने निजी जीवन के अनुभवों को साझा किया है।
कांग्रेस और सेवा समिति का वर्णन
रामप्रसाद जी बताते हैं कि लखनऊ कांग्रेस में जाने की उनकी प्रबल इच्छा थी लेकिन दादी जी और पिताजी ने उनका विरोध किया। उनकी माँ उन्हें सदैव सहयोग करती थीं, इसलिए उन्होंने रामप्रसाद जी को लखनऊ जाने के लिए खर्च दे दिया। लेखक शाहजहाँपुर में सेवा समिति में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करते थे। यह कार्य उनके पिताजी और दादी जी को बिल्कुल पसंद नहीं था। इसलिए उन्हें कभी-कभी दंड भी सहन करना पड़ता था लेकिन माँ सदैव उनके जीवन में साहस का संचार करती थीं। माँ ने उनको समझाया कि विवाह शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् ही करना चाहिए।
दीवानी में मुकदमें का वर्णन
एक समय की बात रामप्रसादजी बताते हैं कि उन्हें वकील ने कहा कि वह पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामें पर कर दें। उन्होंने साफ़ इन्कार कर दिया कि वह ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि यह उनके धर्म के विरुद्ध होगा। रामप्रसाद जी ने अपने जीवन में सदैव सत्य का आचरण किया है।
माँ का वर्णन
वह बताते हैं कि उनकी माँ का जब विवाह हुआ, तब वह ग्यारह वर्ष की थीं। उस समय वह ग्रामीण कन्या के समान अशिक्षित थीं। धीरे-धीरे उन्होंने गृहकार्य को समझ लिया। रामप्रसाद जी के जन्म होने के पाँच या सात वर्ष बाद उनकी माँ ने हिन्दी पढ़ना आरम्भ किया था। रामप्रसाद की बहनों को वह ही शिक्षा देती थीं। जिस प्रेम तथा दृढ़ता के साथ उन्होंने रामप्रसाद जी के जीवन में सुधार किया, वह अवर्णनीय है।
शब्दार्थ
- उत्साह - उमंग, हौसला
- कार्य - काम
- साहस - हिम्मत
- प्रोत्साहन - उत्साह बढ़ना या हिम्मत बढ़ाना
- सत्य - सच
- विरूद्ध - बाधित, अवरुद्ध
- खूब - ज्यादा।