Pariksha Class 6 Summary

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Hindi Class 6 Hindi 415 views Apr 03, 2026 Reviewed & updated Oct 07, 2026
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Pariksha Class 6 Summary

प्रेमचंद हिन्दी के महान् कथा सम्राट हैं। इनका वास्तविक नाम धनपतराय था। इन्होंने समाज-सुधार और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत रचनाओं का सृजन किया। इस पाठ में बताया गया है कि देवगढ़ में सरदार सुजान सिंह नामक दीवान था। वह बूढ़ा होता जा रहा था।, इसलिए उसने सोचा कि कहीं भूल-चूक में बुढ़ापे में दाग न लग जाए। राजा साहब अपने नीतिकुशल दीवान का बड़ा आदर करते थे। वह इस पद पर कार्य नहीं करना चाहते थे। दीवान साहब को राजा ने बहुत समझाया लेकिन वह न माने तब राजा ने शर्त रखी कि रियासत के लिए नया दीवान उनको ही खोजना पड़ेगा।

दूसरे दिन सुयोग्य दीवान की ज़रूरत के लिए पत्रों में विज्ञापन निकाला गया। उसमें हष्ट-पुष्ट उम्मीदवार का होना आवश्यक बताया गया। सैकड़ों आदमी इस विज्ञापन को देखकर अपना-अपना भाग्य परखने के लिए चले आए। सुजान सिंह ने इन सभी महानुभावों का आदर-सत्कार किया। सभी आदमी अपनी अच्छाई का ही प्रदर्शन कर रहे थे जबकि वे असली जीवन में इतने महान् न थे, तब सुजान सिंह ने हॉकी के खेल का प्रस्ताव सभी के समक्ष रखा। सभी खिलाड़ी हॉकी का खेल खेलकर वापस थके हुए आ रहे थे तभी उन्होंने रास्ते में एक किसान को देखा जिसकी गाड़ी नाले में फँस गई थी।

किसी ने उसकी मदद न की तब अन्त में एक खिलाड़ी आता है, जिसके पैरों में चोट लगी हुई थी, तब भी उसने किसान की सहायता की। वही व्यक्ति अन्त में इस रियासत का दीवान बनता है। उसका नाम जानकी नाथ था। सभी उसे ईर्ष्या की नज़रों से देखने लगे। सुजान सिंह सभी को बताते हैं कि उसने स्वयं ज़ख्मी होकर भी किसान की सहायता की। ऐसा व्यक्ति कभी किसी गरीब को नहीं सताएगा।

शब्दार्थ

  1. विनय - प्रार्थना, अनुनय, व्यवहार में दीनता का भाव
  2. परमात्मा - ईश्वर
  3. आदर - सम्मान
  4. नीतिकुशल - नीति में कुशल
  5. नया - नवीन
  6. सुयोग्य - अच्छी योग्यतावाला
  7. ज़रूरत - आवश्यकता
  8. सुशोभित - अति शोभा से युक्त, अत्यंत शोभायमान।

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