Ped Ki Baat Class 6 Summary
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जगदीशचंद्र बसु प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। इनका बचपन प्रकृति का अवलोकन करते हुए व्यतीत हुआ। यह जीव विज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान तथा विज्ञान कथा लेखन में रुचि रखने वाले एक बहुविद् व्यक्ति थे। इन्होंने यह सिद्ध भी किया कि पौधों का एक निश्चित जीवन चक्र व एक प्रजनन प्रणाली होती है और वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक भी होते हैं। 'पेड़ की बात' का बांग्ला से हिन्दी में अनुवाद शंकर सेन ने किया है लेखक ने इस पाठ में पेड़ बनने की पूरी प्रक्रिया का वर्णन मानवीय तौर पर किया है। कई दिनों तक मिट्टी के नीचे बीज पड़े रहते हैं। वर्षा होने के पश्चात् धीरे-धीरे बीज का ढक्कन दरक जाता है वह अंकुरित होकर मिट्टी से बाहर निकल आता है। वृक्ष का अंकुर निकलने पर जो अंश मिट्टी के भीतर प्रवेश करता है, उसका नाम जड़ है और जो अंश ऊपर की ओर बढ़ता है उसे तना कहते हैं। परीक्षण के दौरान कुछ दिन गमले को औंधा लटकाया गया और देखा गया कि डालियाँ टेढ़ी होकर ऊपर की तरफ़ उठ आईं तथा जड़ घूमकर नीचे की ओर लटक गई।
पेड़-पौधे जड़ के द्वारा मिट्टी से अपना रसपान करते हैं। मिट्टी में पानी डालने पर उसके भीतर के बहुत से द्रव्य गल जाते हैं। वृक्ष के पत्ते हवा से भोजन ग्रहण करते हैं। पत्तों में अनगिनत मुँह होते हैं, जिन्हें सूक्ष्मदर्शी के जरिए ही देखा जा सकता है। अगर ज़हरीली वायु पृथ्वी पर इकट्ठी होती रहे तो तमाम जीव-जन्तु कुछ ही दिनों में उसका सेवन करके नष्ट हो सकते हैं। पेड़-पौधे प्रकाश चाहते हैं। बिना सूर्य के प्रकाश के वे बच नहीं सकते। कोई-कोई पेड़ एक वर्ष के बाद ही मर जाते हैं। बीज ही उनकी संतान है जो बाद में एक पेड़ के रूप में विकसित हो जाता है। मधुमक्खी व तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है। वृक्ष अपने फूलों में शहद का संचय करके रखते हैं। मधुमक्खी व तितली बड़े चाव से मधुपान करती हैं। अतः कहा जा सकता है कि इस तरह यह प्रक्रिया चलती रहती है।
शब्दार्थ
- आचर्य - अचंभा, विस्मय
- दरक - दरार
- भीतर - अंदर
- संवर्द्धन - पालन-पोषण, विकास करना
- अभाव - कमी
- अग्रसर - आगे बढ़ता हुआ, विकासशील।